तनाव प्रबंधन एवं मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान” विषय पर एक व्याख्यान-सह-कार्यशाला का सफल आयोजन

आर.के.एस.डी. महाविद्यालय, कैथल की छात्र मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण समिति द्वारा “तनाव प्रबंधन एवं मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान” विषय पर एक व्याख्यान-सह-कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम महाविद्यालय के शिक्षक एवं गैर-शिक्षक कर्मचारियों के लिए विशेष रूप से आयोजित किया गया था। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कार्यस्थल पर मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को रेखांकित करना, कर्मचारियों में जागरूकता उत्पन्न करना तथा तनाव से प्रभावी ढंग से निपटने के व्यावहारिक उपायों की जानकारी प्रदान करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ औपचारिक स्वागत के साथ हुआ। संयोजिका डॉ. गीता गोयल ने उपस्थित अतिथियों, प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों का अभिनंदन करते हुए कहा कि मानसिक स्वास्थ्य आज के समय की एक अत्यंत महत्वपूर्ण आवश्यकता है, जिसे प्रायः कार्यभार और दायित्वों के बीच अनदेखा कर दिया जाता है। उन्होंने इस पहल को महाविद्यालय की संवेदनशील कार्य-संस्कृति की दिशा में एक सार्थक कदम बताया।

इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. हरदीप लाल जोशी, प्रोफेसर एवं अध्यक्ष, मनोविज्ञान विभाग, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र ने अपने विस्तृत, विश्लेषणात्मक एवं ज्ञानवर्धक व्याख्यान में मानसिक स्वास्थ्य के विभिन्न आयामों—भावनात्मक संतुलन, आत्म-जागरूकता, व्यवहारिक दक्षता एवं सामाजिक सामंजस्य—पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कार्यस्थल पर उत्पन्न होने वाले तनाव के प्रमुख कारणों जैसे समय-सीमा का दबाव, प्रशासनिक उत्तरदायित्व, पारस्परिक संप्रेषण की कमी, अपेक्षाओं का बोझ तथा कार्य-जीवन संतुलन की चुनौतियों को रेखांकित किया।डॉ. जोशी ने कहा कि तनाव को पूर्णतः समाप्त करना संभव नहीं, किंतु उसे सकारात्मक ऊर्जा में रूपांतरित किया जा सकता है। उन्होंने सकारात्मक सोच, संतुलित जीवनशैली, नियमित व्यायाम, ध्यान एवं प्राणायाम, प्रभावी संवाद-कौशल, समय प्रबंधन तथा आत्म-अनुशासन को तनाव नियंत्रण के प्रमुख साधन बताया। उन्होंने यह भी कहा कि मानसिक संतुलन ही कार्यकुशलता, सृजनात्मकता एवं संतुष्टि का आधार है। कार्यशाला के अंतर्गत उन्होंने कुछ व्यावहारिक गतिविधियाँ एवं लघु अभ्यास भी करवाए, जिनसे प्रतिभागियों को तनाव प्रबंधन की तकनीकों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त हुआ।कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए अपने अनुभवों, समस्याओं एवं जिज्ञासाओं को साझा किया। प्रश्नोत्तर सत्र विशेष रूप से संवादात्मक एवं प्रेरणादायक रहा, जिसमें डॉ. जोशी ने व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से विभिन्न परिस्थितियों में मानसिक संतुलन बनाए रखने के उपाय स्पष्ट किए।

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. गगन मित्तल ने अपने विस्तृत एवं प्रेरक संबोधन में कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान की सफलता केवल शैक्षणिक उपलब्धियों से नहीं, बल्कि उसके कर्मचारियों के मानसिक, भावनात्मक एवं सामाजिक स्वास्थ्य से भी मापी जाती है। उन्होंने कहा कि शिक्षक एवं गैर-शिक्षक कर्मचारी संस्थान की धुरी हैं और उनका मानसिक रूप से स्वस्थ, संतुलित एवं प्रेरित रहना अत्यंत आवश्यक है। वर्तमान समय की तीव्र प्रतिस्पर्धा, प्रशासनिक दायित्वों और शैक्षणिक दबावों के बीच मानसिक संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है, अतः ऐसे कार्यक्रम समय की अनिवार्य आवश्यकता हैं।डॉ. मित्तल ने आगे कहा कि महाविद्यालय प्रशासन एक सकारात्मक, सहयोगात्मक एवं संवेदनशील कार्य-संस्कृति के निर्माण के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है, जहाँ प्रत्येक कर्मचारी को सम्मान, संवाद और सहयोग का वातावरण प्राप्त हो। उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में भी इस प्रकार के जागरूकता एवं क्षमता-विकास कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे।

महाविद्यालय के प्रधान श्री अश्वनी शोरेवाला ने अपने संदेश में कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान की वास्तविक शक्ति उसके मानव संसाधन में निहित होती है। यदि शिक्षक एवं कर्मचारी मानसिक रूप से सशक्त, संतुलित एवं सकारात्मक रहेंगे तो संस्थान की प्रगति सुनिश्चित होगी। उन्होंने इस पहल के लिए महाविद्यालय प्रशासन एवं मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण समिति को हार्दिक बधाई दी।उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ते कार्य-दबाव, प्रतिस्पर्धा, तकनीकी परिवर्तनों एवं सामाजिक दायित्वों के कारण मानसिक तनाव एक सामान्य चुनौती बन चुका है। ऐसे में संस्थानों का दायित्व है कि वे अपने कर्मचारियों के लिए संवेदनशील, सहयोगात्मक एवं संवादपरक वातावरण उपलब्ध कराएँ, जिससे वे अपने दायित्वों का निर्वहन आत्मविश्वास एवं संतुलन के साथ कर सकें।

कार्यक्रम का सफल संयोजन मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण समिति की संयोजिका डॉ. गीता गोयल द्वारा किया गया। मंच संचालन डॉ. प्रीति बंसल एवं डॉ. अनुकृति ने अत्यंत कुशलतापूर्वक किया। अंत में डॉ. गीता गोयल ने मुख्य वक्ता, प्राचार्य, प्रधान, शिक्षक वर्ग एवं गैर-शिक्षक कर्मचारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह कार्यशाला सभी के लिए प्रेरणादायक एवं उपयोगी सिद्ध हुई है।इस प्रकार यह व्याख्यान-सह-कार्यशाला न केवल ज्ञानवर्धक रही, बल्कि महाविद्यालय में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, संवाद और सकारात्मक सोच को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुई।

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