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इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स एवं पेटेंट फाइलिंग” विषय पर एक दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का सफल एवं प्रभावी आयोजन

आरकेएसडी कॉलेज, कैथल के इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल(आईआईसी) ने आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ(आईक्यूएसी) के सहयोग से “इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स एवं पेटेंट फाइलिंग” विषय पर एक दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का सफल एवं प्रभावी आयोजन किया।

**इस कार्यक्रम में कॉलेज के विभिन्न विभागों से लगभग 125 प्राध्यापकों ने सक्रिय सहभागिता की।

**इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. राहुल तनेजा, वैज्ञानिक, पेटेंट सूचना केंद्र, हरियाणा ने उपस्थित प्राध्यापकों को संबोधित किया।

**कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गगन मित्तल ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे कार्यक्रम न केवल शिक्षकों के ज्ञान को समृद्ध करते हैं, बल्कि संस्थान में शोध संस्कृति एवं नवाचार की भावना को भी सुदृढ़ करते हैं। उन्होंने कहा कि आज के ज्ञान-आधारित समाज में बौद्धिक संपदा अधिकारों की समझ प्रत्येक शिक्षाविद के लिए अत्यंत आवश्यक हो गई है।

**प्रधान श्री अश्वनी शोरेवाला ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए प्राचार्य डॉ. गगन मित्तल को बधाई दी और कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक आयोजन संकाय सदस्यों के बौद्धिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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आरकेएसडी कॉलेज में ‘इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स एवं पेटेंट फाइलिंग’ पर सफल फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम, 125 प्राध्यापकों ने की सहभागिता

आरकेएसडी कॉलेज, कैथल के इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल(आईआईसी) ने आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ(आईक्यूएसी) के सहयोग से “इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स एवं पेटेंट फाइलिंग” विषय पर एक दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का सफल एवं प्रभावी आयोजन किया। इस कार्यक्रम में कॉलेज के विभिन्न विभागों से लगभग 125 प्राध्यापकों ने सक्रिय सहभागिता की। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को बौद्धिक संपदा अधिकारों की अवधारणा, उसके व्यावहारिक महत्व तथा पेटेंट दाखिल करने की विधिवत प्रक्रिया से अवगत कराना था, ताकि वे अपने शोध एवं नवाचार कार्यों को विधिक संरक्षण प्रदान कर सकें।

इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. राहुल तनेजा, वैज्ञानिक, पेटेंट सूचना केंद्र, हरियाणा ने उपस्थित प्राध्यापकों को संबोधित किया। अपने व्याख्यान में उन्होंने बौद्धिक संपदा अधिकारों के विभिन्न आयामों—जैसे पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क एवं इंडस्ट्रियल डिज़ाइन—पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्तमान वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में शोध एवं नवाचार को कानूनी संरक्षण प्रदान करना अत्यंत आवश्यक है, ताकि शोधकर्ताओं की बौद्धिक संपदा सुरक्षित रह सके और उसे व्यावसायिक रूप से भी उपयोग में लाया जा सके।डॉ. तनेजा ने पेटेंट फाइलिंग की चरणबद्ध प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज, पूर्व कला खोज, आवेदन की समय-सीमा तथा आवेदन करते समय बरती जाने वाली सावधानियों की विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने अनेक जिज्ञासाएँ प्रस्तुत कीं, जिनका समाधान उन्होंने उदाहरणों सहित किया।

कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गगन मित्तल ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे कार्यक्रम न केवल शिक्षकों के ज्ञान को समृद्ध करते हैं, बल्कि संस्थान में शोध संस्कृति एवं नवाचार की भावना को भी सुदृढ़ करते हैं। उन्होंने कहा कि आज के ज्ञान-आधारित समाज में बौद्धिक संपदा अधिकारों की समझ प्रत्येक शिक्षाविद के लिए अत्यंत आवश्यक हो गई है। डॉ. मित्तल ने आगे कहा कि नई शिक्षा नीति के परिप्रेक्ष्य में अनुसंधान, नवाचार एवं उद्यमिता को विशेष महत्व दिया गया है, और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स की जानकारी इन तीनों क्षेत्रों को सशक्त बनाने का प्रमुख माध्यम है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि आरकेएसडी कॉलेज निरंतर ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रमों का आयोजन करता रहेगा, जिससे संकाय सदस्यों में शोध-उन्मुख दृष्टिकोण विकसित हो तथा वे अपने मौलिक कार्यों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिला सकें। उन्होंने संकाय सदस्यों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे अपने शोध परिणामों को केवल प्रकाशन तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें पेटेंट और अन्य विधिक संरक्षण के माध्यम से समाजोपयोगी उत्पादों एवं तकनीकों में परिवर्तित करने की दिशा में भी कार्य करें।

प्रधान श्री अश्वनी शोरेवाला ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए प्राचार्य डॉ. गगन मित्तल को बधाई दी और कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक आयोजन संकाय सदस्यों के बौद्धिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान की वास्तविक पहचान उसकी शोध-संस्कृति, नवाचार क्षमता और शैक्षणिक प्रतिबद्धता से होती है। उन्होंने कहा कि प्रबंधन समिति सदैव ऐसे प्रयासों को प्रोत्साहित करती रहेगी, जो शिक्षकों और विद्यार्थियों को सृजनात्मक सोच, मौलिक अनुसंधान तथा उद्यमशीलता की दिशा में प्रेरित करें। उन्होंने यह भी विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में आरकेएसडी कॉलेज बौद्धिक संपदा सृजन एवं पेटेंट दाखिल करने के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ अर्जित करेगा और क्षेत्र में एक अग्रणी संस्थान के रूप में अपनी पहचान स्थापित करेगा।

मंच संचालन एवं कार्यक्रम का कुशल समन्वय इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स सेल की समन्वयक डॉ. पूजा गुप्ता द्वारा किया गया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन आईक्यूएसी समन्वयक डॉ. जयबीर धारिवाल द्वारा प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में आईआईसी के अध्यक्ष डॉ. राजबीर पराशर, उपाध्यक्ष डॉ. सीमा गुप्ता, संयोजक डॉ. रचना सरदाना, पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. नरेश कुमार, डॉ. अनुराग ने भी सक्रिय सहयोग प्रदान किया।कार्यक्रम का समापन औपचारिक धन्यवाद के साथ हुआ। उपस्थित प्राध्यापकों ने इसे अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी बताते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों की अपेक्षा व्यक्त की। यह आयोजन न केवल शिक्षकों को बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रति जागरूक करने में सफल रहा, बल्कि संस्थान में नवाचार एवं शोध को नई दिशा देने की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ।

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