आरकेएसडी कॉलेज, कैथल के अर्थशास्त्र विभाग द्वारा “केंद्रीय बजट 2026–27 का नीडोनॉमिक्स दृष्टिकोण से विश्लेषण” विषय पर एक विशिष्ट विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर नीडोनॉमिक्स विचारधारा के प्रवर्तक, तथा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रोफेसर प्रो. (डॉ.) मदन मोहन गोयल मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गगन मित्तल ने की। उन्होंने अतिथि वक्ता का औपचारिक स्वागत करते हुए उनके बहुआयामी शैक्षणिक, शोध एवं प्रशासनिक अनुभव का उल्लेख किया। अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. मित्तल ने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों का दायित्व केवल पाठ्यक्रम के निर्वहन तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को समसामयिक राष्ट्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर गंभीर, विश्लेषणात्मक एवं रचनात्मक चिंतन के लिए प्रेरित करना भी है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय दस्तावेज का नीडोनॉमिक्स दृष्टिकोण से विश्लेषण विद्यार्थियों को आर्थिक नीतियों के गूढ़ आयामों को समझने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने प्रो. गोयल के समृद्ध अनुभव को विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए कहा कि आरकेएसडी कॉलेज ज्ञान-आधारित संवाद, नीति-चिंतन और नैतिक मूल्यों पर आधारित शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे केवल परीक्षोपयोगी ज्ञान तक सीमित न रहकर राष्ट्र की आर्थिक, सामाजिक एवं नैतिक चुनौतियों को समझें और एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएँ।
कॉलेज के प्रधानश्री अश्वनी शोरेवाला ने कहा कि आरकेएसडी कॉलेज सदैव गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, वैचारिक समृद्धि और राष्ट्रहित में सार्थक विमर्श को बढ़ावा देता रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट केवल आय-व्यय का विवरण नहीं, बल्कि राष्ट्र की प्राथमिकताओं, नीतिगत दृष्टि और भविष्य की विकास-योजना का प्रतिबिंब होता है। ऐसे में नीडोनॉमिक्स जैसे वैकल्पिक आर्थिक दृष्टिकोण के माध्यम से बजट का विश्लेषण विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने अर्थशास्त्र विभाग के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि विभाग निरंतर समसामयिक विषयों पर शैक्षणिक गतिविधियों का आयोजन कर विद्यार्थियों को व्यवहारिक एवं विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण प्रदान कर रहा है। प्रो. (डॉ.) मदन मोहन गोयल जैसे प्रतिष्ठित शिक्षाविद् को आमंत्रित करना विभाग की अकादमिक प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि ऐसे व्याख्यान विद्यार्थियों को शोध, नीति-विश्लेषण और राष्ट्र-निर्माण की दिशा में प्रेरित करेंगे तथा ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की प्राप्ति में उनकी सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करेंगे।
अपने व्याख्यान में प्रो. गोयल ने ₹53,47,315 करोड़ के आकार वाले केंद्रीय बजट 2026–27 को ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की दिशा में आवश्यक कदम बताया, किंतु इसे पर्याप्त नहीं माना। उन्होंने सुझाव दिया कि भारत की ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए वित्तीय वर्ष को 1 जुलाई से 30 जून तक पुनर्परिभाषित किया जाना चाहिए, जिससे वित्तीय नियोजन अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुख बन सके।
नीडोनॉमिस्ट प्रो. गोयल ने अत्यधिक रियायतों (सॉप्स) पर निर्भरता को नीतिगत दृष्टि से चिंताजनक बताते हुए कहा कि इससे नीतियाँ परिवर्तनकारी होने के बजाय संदिग्ध बन सकती हैं। उन्होंने बताया कि भारत की कुल जनसंख्या में आयकर दाताओं की हिस्सेदारी मात्र 2.6 प्रतिशत है, जबकि 6.68 प्रतिशत नागरिकों ने आयकर रिटर्न दाखिल किए हैं। ऐसे में करदाताओं को लक्षित संस्थागत सहयोग प्रदान किया जाना आवश्यक है।
रक्षा व्यय में 15 प्रतिशत वृद्धि को उचित ठहराते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा की अवधारणा में बेरोजगारी एवं अल्परोजगार जैसी आंतरिक चुनौतियों का समाधान भी शामिल होना चाहिए, विशेषकर कृषि क्षेत्र में, जो “जय जवान, जय किसान” की भावना को सुदृढ़ करता है।
प्रो. गोयल ने शासन-प्रणाली में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डालते हुए नैतिक निगरानी की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने शिक्षा उपकर के प्रभावी उपयोग, जेंडर बजटिंग के सुदृढ़ क्रियान्वयन तथा विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति हेतु सभी हितधारकों से स्ट्रीट-स्मार्ट—अर्थात् सरल, नैतिक, क्रियाशील, उत्तरदायी एवं पारदर्शी—बनने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के अंत में अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. सूरज वालिया ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जबकि मंच संचालन डॉ. रितु कांग वालिया ने कुशलतापूर्वक किया।
इस अवसर पर डॉ. हरिंदर गुप्ता (प्राचार्य प्रभारी, सायंकालीन सत्र), डॉ. मीनू अग्रवाल, डॉ. मनोज बंसल, सुश्री डिंकी एवं सुश्री नीलम सहित अनेक प्राध्यापक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे
