आर.के.एस.डी. महाविद्यालय, कैथल के अर्थशास्त्र विभाग द्वारा हरियाणा के महानिदेशक उच्च शिक्षा (डीजीएचई), हरियाणा की स्वीकृति से “भारत के अनुभव@100 : विकास यात्रा का विश्लेषण और भविष्य के पदचिन्ह” विषय पर एक दिवसीय अंतर्विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती पूजन के साथ हुआ।
महाविद्यालय के प्रधान श्री अश्वनी शोरेवाला ने कहा कि विकसित भारत केवल सरकार की योजना नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का राष्ट्रीय दायित्व है। उन्होंने कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में शिक्षित, कुशल एवं नैतिक मूल्यों से युक्त युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है।उन्होंने बताया कि आर.के.एस.डी. महाविद्यालय जैसे शैक्षणिक संस्थान राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में आधार स्तंभ की भूमिका निभाते हैं। इस संगोष्टी के माध्यम से उन्होंने आर्थिक सशक्तिकरण, नवाचार, उद्यमिता और आत्मनिर्भरता को विकसित भारत के प्रमुख स्तंभ बताते हुए, विद्यार्थियों को अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग देश की प्रगति के लिए करने का आह्वान किया।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. गगन मित्तल ने अर्थशास्त्र विभाग द्वारा आयोजित इस सार्थक संगोष्ठी की सराहना की। उन्होंने संगोष्ठी का उद्घाटन करते हुए भारत के विकासात्मक भविष्य के निर्माण में शैक्षणिक अनुसंधान एवं बौद्धिक विमर्श की आवश्यकता पर बल दिया।उन्होंने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य समावेशी विकास, सामाजिक न्याय, तकनीकी उन्नति और सतत विकास पर आधारित है उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि उच्च शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि जागरूक एवं जिम्मेदार नागरिक बनना भी है। उन्होंने छात्रों को अनुसंधान, नीति-निर्माण और कौशल विकास गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी हेतु प्रेरित किया, ताकि वे भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प में अपना योगदान दे सकें।अंत में उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अनुशासन, परिश्रम और नवाचार के माध्यम से युवा शक्ति देश के उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करेगी।
संगोष्ठी के विषय का परिचय संगोष्ठी संयोजक डॉ. सूरज वालिया ने प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि केवल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि पर्याप्त नहीं है, बल्कि समावेशी, सतत एवं बहुआयामी विकास के माध्यम से ही “विकसित भारत” के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। उद्घाटन सत्र का एक प्रमुख आकर्षण संगोष्ठी स्मारिका का विमोचन रहा। मुख्य वक्तव्य कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र के अर्थशास्त्र विभाग के प्रोफेसर (डॉ.) अशोक चौहान द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने भारत के संरचनात्मक सुधारों, आर्थिक सुदृढ़ता तथा सतत एवं समावेशी विकास की दिशा में उपस्थित चुनौतियों एवं संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
डीजीएचई हरियाणा के सहायक निदेशक डॉ. गौरव सैनी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र के रजिस्ट्रार लेफ्टिनेंट (डॉ.) वीरेंद्र पाल मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। उद्घाटन सत्र का धन्यवाद ज्ञापन प्रो. (डॉ.) राजबीर पराशर, अध्यक्ष, अंग्रेज़ी विभाग द्वारा प्रस्तुत किया गया।
पूर्ण अधिवेशन में विशिष्ट वक्ताओं ने अपने विचार रखे। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक के राजनीति विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रदीप कुमार ने बहुपक्षीय मंचों पर भारत की आकांक्षाओं एवं उसकी उभरती वैश्विक भूमिका पर व्याख्यान दिया। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ के पुस्तकालय, कला एवं मानविकी विभाग की प्रोफेसर (डॉ.) मोनिका मेहरोत्रा ने भारत में महिलाओं की बदलती स्थिति एवं लैंगिक समावेशी विकास की आवश्यकता पर बल दिया।
दोपहर भोजनावकाश के पश्चात पाँच समानांतर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनकी अध्यक्षता डॉ. संदीप कुमार, प्रो. सुरेंद्र सिंह, प्रो. गीता गोयल, डॉ. सारिका चौधरी एवं डॉ. सुरुचि शर्मा ने की। सह-अध्यक्ष के रूप में डॉ. रचना सरदाना, डॉ. कुसुम, डॉ. अनुकृति एवं डॉ. मनोज बंसल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लगभग 80 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया तथा लगभग 70 शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए। इसके अतिरिक्त राज्य स्तरीय पोस्टर प्रस्तुति प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें 8 महाविद्यालयों की 20 टीमों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
समापन सत्र का शुभारंभ प्रो. (डॉ.) राजबीर पराशर के स्वागत भाषण से हुआ। बी.ए.आर. जनता कॉलेज, कौल के प्राचार्य डॉ. ऋषि पाल विशिष्ट अतिथि के रूप में तथा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र के अर्थशास्त्र विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. किरण लाम्बा विशेष आमंत्रित अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। संगोष्ठी प्रतिवेदन डॉ. रितु वालिया, सह-संयोजक द्वारा प्रस्तुत किया गया।
इस अवसर पर “भारत के अनुभव@100 : विकास यात्रा का विश्लेषण और भविष्य के पदचिन्ह” शीर्षक पुस्तक, जिसका संपादन डॉ. रितु वालिया एवं डॉ. सूरज वालिया द्वारा किया गया, का औपचारिक विमोचन किया गया। प्राचार्य (सायंकालीन सत्र) डॉ. हरिंदर गुप्ता ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
पोस्टर प्रस्तुति प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार डी.ए.वी. कन्या महाविद्यालय, यमुनानगर की खुशी एवं अश्मिता तथा आर.के.एस.डी. महाविद्यालय, कैथल की जस्सी एवं श्रुति को प्राप्त हुआ। द्वितीय पुरस्कार दयाल सिंह महाविद्यालय, करनाल की गोपिका तथा आर.के.एस.डी. महाविद्यालय, कैथल की जरीना एवं जसप्रीत को प्रदान किया गया। तृतीय पुरस्कार आई.जी. महिला महाविद्यालय कैथल की पायल तथा सी.आई.एस. के.एम.वी., पुंडरी की स्नेहा एवं लक्षिता को दिया गया। सांत्वना पुरस्कार डी.ए.वी. महाविद्यालय, पुंडरी की भारती एवं हेमंत तथा आर.के.एस.डी. महाविद्यालय, कैथल की स्नेहा एवं राजीव को प्रदान किए गए।
मंच संचालन सुश्री डिंकी खुराना एवं डॉ. रचना सरदाना द्वारा किया गया। संगोष्ठी सक्रिय सहभागिता एवं सार्थक शैक्षणिक विमर्श के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुई। समस्त संकाय सदस्यों के सामूहिक प्रयासों से यह आयोजन सुचारु रूप से सम्पन्न हुआ, जो संस्थान की शैक्षणिक उत्कृष्टता एवं राष्ट्र-निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
