राष्ट्रीय संगोष्ठी में “सर्वश्रेष्ठ शोध परियोजना” पुरस्कार

राष्ट्रीय संगोष्ठी में आरकेएसडी कॉलेज के विद्यार्थियों ने “सर्वश्रेष्ठ शोध परियोजना” पुरस्कार जीता

आर.के.एस.डी. कॉलेज, कैथल के अर्थशास्त्र विभाग ने एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक उपलब्धि हासिल की है। महाविद्यालय के विद्यार्थियों की एक टीम ने सेंट जेवियर्स कॉलेज,जयपुर में आयोजित पंचम राष्ट्रीय संगोष्ठी में “सर्वश्रेष्ठ शोध परियोजना” का प्रतिष्ठित पुरस्कार एवं ₹5,000 की नकद राशि प्राप्त कर महाविद्यालय का नाम रोशन किया।परियोजना कार्य के लिए प्रारंभिक वित्तीय सहायता (सीड मनी) भी उपलब्ध कराई गई थी।

पुरस्कार विजेता शोध परियोजना का विषय “विकसित भारत @2047 के संदर्भ में आयुष्मान भारत योजना की जागरूकता, उपयोगिता एवं प्रभाव का मूल्यांकन: कैथल (हरियाणा) जिले का अध्ययन” था, जिसे उसकी गहन विश्लेषणात्मकता एवं राष्ट्रीय विकास से जुड़े महत्व के कारण सराहा गया।

यह शोध कार्य जनवरी माह में प्रारंभ हुआ और लगभग तीन महीनों के कठिन परिश्रम के बाद पूर्ण हुआ। विद्यार्थियों ने कैथल जिले के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में व्यापक सर्वेक्षण कर आयुष्मान भारत योजना की वास्तविक स्थिति का अध्ययन किया।

इस शोध टीम में राजीव, मुस्कान, हिमांशी (बी.ए. ऑनर्स अर्थशास्त्र तृतीय वर्ष), यश मित्तल (बी.ए. ऑनर्स अर्थशास्त्र द्वितीय वर्ष), देवांश सिरोही (बी.ए. द्वितीय वर्ष) तथा पूजा (एम.कॉम.) शामिल रहे। इस परियोजना का निर्देशन अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. सुरज वालिया के कुशल मार्गदर्शन में किया गया।यह संगोष्ठी “विजन फॉर विकसित भारत @2047” विषय पर 17 अप्रैल 2026 को सेंट जेवियर्स कॉलेज, जयपुर के रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेल द्वारा आयोजित की गई थी।

विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि

“हमने अपने प्रोजेक्ट के लिए ‘आयुष्मान भारत: उपयोग, जागरूकता एवं प्रभाव’ जैसे महत्वपूर्ण विषय का चयन किया। इस प्रोजेक्ट के दौरान हमें फील्ड वर्क, डेटा एनालिसिस, टीमवर्क और टाइम मैनेजमेंट जैसे कई महत्वपूर्ण पहलुओं को सीखने का अवसर मिला। हमने इस प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय संगोष्ठी जयपुर में प्रस्तुत किया, जहाँ हमें विशेष उपलब्धि प्राप्त हुई और सर्वश्रेष्ठ प्रोजेक्ट का पुरस्कार मिला। अंत में हम अपने सुपरवाइजर डॉ. सुरज वालिया तथा महाविद्यालय प्रबंधन का हृदय से धन्यवाद करते हैं, जिनका हमें प्रत्येक चरण पर मार्गदर्शन एवं सहयोग प्राप्त होता रहा।”

प्रश्नावली के वैज्ञानिक एवं सुव्यवस्थित निर्माण में महाविद्यालय के पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. नरेश कुमार का विशेष मार्गदर्शन एवं सहयोग प्राप्त हुआ। उनके मार्गदर्शन में ही डेटा संकलन को प्रभावी ढंग से संपन्न किया गया। इसके अतिरिक्त, एसपीएसएस (SPSS) के माध्यम से डेटा विश्लेषण में भी डॉ. नरेश कुमार का महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिससे शोध कार्य को सटीक, विश्वसनीय एवं व्यवस्थित स्वरूप प्राप्त हुआ।

प्राचार्य डॉ. गगन मित्तल ने कहा कि यह उपलब्धि महाविद्यालय में विकसित हो रही शोधपरक संस्कृति एवं शैक्षणिक उत्कृष्टता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि हमारे विद्यार्थी केवल शिक्षार्थी ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय नीतियों एवं विकास की दिशा में योगदान देने वाले सक्रिय शोधकर्ता भी हैं।उन्होंने इन विद्यार्थियों का महाविद्यालय में स्वागत किया तथा उन्हें भविष्य में भी इस प्रकार की प्रतियोगिताओं में भाग लेकर और भी बड़े पुरस्कार हासिल करने के लिए प्रेरित किया।

प्रधान श्री अश्वनी शोरेवाला ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि विद्यार्थियों की यह सफलता उनके परिश्रम एवं संस्थान की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का परिणाम है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों एवं मार्गदर्शक को बधाई दी।

यह शोध कार्य विशेष रूप से इस बात पर केंद्रित था कि स्वास्थ्य योजनाएं किस प्रकार वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में सहायक सिद्ध हो रही हैं, और इसके लिए हरियाणा के जमीनी स्तर से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण प्रस्तुत किया गया।

इस अवसर पर उप-प्राचार्य डॉ. राजबीर पराशर, डॉ. एस. पी. वर्मा, डॉ. ऋतु वालिया, नीलम भाटिया तथा पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. नरेश कुमार भी उपस्थित रहे

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